
कुछ दिन बीते पलों में,
कुछ पल बीते दिनों में।
कुछ रातें शांत अकेली,
तो कुछ उत्सव मनाती।
इन दिनों बहुत कुछ सीखा,
विविध अनुभव-भूषित हुआ।
मीठी बातें, मुस्कराते चेहरे,
कुछ अपने, कुछ पराये।
कुछ अध्यापक चाव से पढाते,
तो कुछ हमें रास न आते।
मित्रों की महफिलें सजी,
जीवनभर की यादें बनी।
बंगाल की यह मीठी वाणी,
‘भालो’ के बाद पूरी अनजानी।
यहाँ के लोग, पेड, बरसात,
खडगपुर की निराली है बात!
इन यादों के गीत गुनगुनाता रहुंगा,
अभी चलता हूँ दोस्तों, मिलता रहुंगा।
© भूषण कुलकर्णी
बहुत खूब 🙂
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