
वे छोटे से दिये, वह बंबू की चटाई
सोचा न था, यूँ कमाल कर दिखाएगी!
दीप से दीप जुडते गये, चित्ररेखाओंमें सजते गये।
फिर आई दिवाली की शाम, साथ-साथ जगमग हुए।
जैसे ही दृश्य दर्शित हुआ, हमारी आँखें चमक उठी।
शब्दोंमें क्या बयान करे, आनंद की जो अनुभूति हुई!
कभी श्रीकृष्ण आकर गीता सुनाते
कभी हनुमानजी लंका जलाते।
कभी कर्ण का रथ फँसता
कभी सीतादेवी की अग्निपरीक्षा।
वे दिये कुछ ऐसे रोशन हुए
दिल कहे, एक दीपक बन जाए!
सबके साथ मिलकर नयी दुनिया बनाये
जीवन के बाद भी मधुर स्मृति छोड जाए!
Illumination and Rangoli make Diwali at IIT Kharagpur very special. This poem describes Illumination (illu).
© भूषण कुलकर्णी