राम कहें

कभी रोकर तो कभी खिलकर राम कहें
बस इतना हो, उन्हें समझकर राम कहें।

पत्थर से दिल को रामचरण दिख जाएँ
अहिल्या जैसे मुक्त होकर राम कहें।

इन आँखों से राम दर्शन न होंगे तो
भरत की तरह चरण पूजकर राम कहें।

दिल की झोपडी को साफ करते रहें
शबरी जैसे राह देखकर राम कहें।

अधर्म की लंका देखकर न घबराएं
हनुमान जैसे वो जलाकर राम कहें।

बिछडे हुए ही सही, बालक हैं उनके
लव-कुश की तरह उन्हें मिलकर राम कहें।

© भूषण कुलकर्णी

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