Hindi translation of my Marathi Ghazal चढाई
सत्य बताते वक्त सबसे लडना पडा
अंत में झूठ का धंदा सीखना पडा।
वो चढान चढते हुए बस इतनी तकलीफ हुई
खुद को संभालने के लिये थोडा झुकना पडा।
बालक की जिस कला का बोलबाला हुआ
वही नाटक जीवन भर उसे निभाना पडा।
मुझे क्या पसंद है, कभी सवाल नही आया
बकरियों की तरह झुंड में चलना पडा।
कार्य ये मेरा नही, मार्ग ये मेरा नही
ये समझने के लिये इतने साल पढना पडा।
आंसुओं से सजी थी महफिलें सारी
सीधीसाधी हँसी को दबाना पडा।
शांती से समझाया तो उन्होंने सुना नही
शांती के लिये ही फिर शस्त्र उठाना पडा।
इस पामर को क्या भगवान मिलेंगे
महान संतोंको भी कितना रिझाना पडा…
© भूषण कुलकर्णी