मोमबत्ती

अपनी ही मस्ती में खोकर चलता हूँ मै
राह में थोडासा सत्य चुनकर चलता हूँ मै।

वसंत ऋतु आयी, कभी पता ही नही चला
लक्ष्य की तरफ ही ध्यान देकर चलता हूँ मै।

सुनाई नहीं देती है जिंदा लोगोंकी पुकार
आत्मा के लिए मोमबत्ती लेकर चलता हूँ मै।

शौकीन कर्जा वे चुका नहीं पाते
उन्हें जरासा चंदा देकर चलता हूँ मै।

कैसे देख पाऊंगा ये रंग इंसानों के?
फिर से अपनी आँखे मूँदकर चलता हूँ मै।

(Hindi translation of my Marathi ghazal मेणबत्ती)

© भूषण कुलकर्णी

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