बहाव

क्या कहूं तुम्हारे बहाव पर?
रह गया मैं हमेशा किनारे पर

गलत फहमी को क्यों दिल में रखा?
सच्चे साथी कम होने पर

दिल बारबार पीछे देखता है
आगे का रास्ता धुंधला दिखने पर

दरवाजा खुला ही रखा है
एक अवसर निकल जाने पर

याद यहाँ की यहीं खतम हो जाए
फिर बोझ न रहेगा अगले जनम पर

© भूषण कुलकर्णी

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