
आज कुछ अलग ही समा है
तन भी आसमान मे, मन भी आसमान मे!
जिन रास्तों के हर मोड खूबसूरत थे
उनकी मंजिल तक आज पहुंच रहे है।
कई दिनों से चल रहे थे इस मंजिल के लिए
यहाँ पहुंचे तो लगा, कुछ जल्दी आ गए।
याद आती है वे गलियाँ जिनसे हम गुजरे थे
हर कदम पर थोडा-थोडा बेहतर हुए थे।
उन राहों पर आज फिर से चलेंगे
जिनके साथ चले थे, उन साथियों से मिलेंगे।
यही इस मंजिल की खासियत है
सभी साथी खुशी मे साथ-साथ है।
© भूषण कुलकर्णी















