अपमान की ठोकरोंसे मन आहत हुआ था
अबतक मेरा मूल स्वरूप अनजान ही रहा था।
हे कृष्ण,
अँधेरे मे भटकते वक्त आपने मार्ग दिखाया
इस सूर्यकिरण को ही आपने प्रकाश दिखाया!
रहस्य सुलझ गये आज जीवनभर के
कवच, कुंडल, गंगाजल, सूर्यकिरणोंके।
पर जो मार्ग दिखाया, वह पीछे छूट गया
सत्य समझने मे बहुत विलम्ब हो गया।
आप छोड गये गोकुल, यशोदामैया को
पर मै कैसे भूल जाऊं मेरी राधामाँ को?
दुर्योधन की मित्रता बंधुप्रेम से प्यारी है
सूतोंका प्यार राजमुकुट पर भारी है!
बंधु, कीर्ति, राज्य पर मोहित नही होगा
यह सूर्यकिरण एक ही दिशा से जायेगा।
अब महायुद्ध मे तांडव करेगा
सूर्यकिरण सारे कृष्णमेघ भेदेगा!
© भूषण कुलकर्णी


